विवाह मांगलिक दोष की काट के प्रभावी ज्योतिष उपाय

मांगलिक दोष की काट के उपाय और मंगल दोष निवारण के सरल टोटके
मांगलिक दोष से मुक्ति के लिए प्रभावी ज्योतिष उपाय

भारतीय ज्योतिष शास्त्र में मांगलिक दोष को विवाह संबंधी सबसे महत्वपूर्ण और चर्चित दोषों में से एक माना जाता है। यह दोष न केवल वैवाहिक जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि व्यक्ति के समग्र जीवन, स्वास्थ्य, करियर और पारिवारिक रिश्तों पर भी अपना प्रभाव डालता है। हालांकि, मांगलिक दोष का नाम सुनते ही लोगों के मन में भय और चिंता उत्पन्न हो जाती है, लेकिन सच्चाई यह है कि सही ज्ञान, उपाय और मार्गदर्शन से इस दोष के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

इस ज्ञानवर्धक लेख में हम जानेंगे कि मांगलिक दोष क्या होता है, यह कब और कैसे बनता है, इसके दुष्प्रभाव क्या हैं, और सबसे महत्वपूर्ण – मांगलिक दोष की काट के उपाय कौन-कौन से हैं। यह लेख उन सभी लोगों के लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शिका है जो मांगलिक दोष से मुक्ति पाना चाहते हैं और अपने वैवाहिक जीवन को सुखमय बनाना चाहते हैं।

मांगलिक दोष क्या होता है? यह दोष कब और कैसे बनता है?

वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में मंगल ग्रह विशेष भावों में स्थित होता है, तो उस व्यक्ति को ‘मांगलिक’ या ‘मंगली’ कहा जाता है। मंगल ग्रह को सेनापति और पराक्रम का स्वामी माना जाता है, जो स्वभाव से उग्र और अग्नि तत्व प्रधान है।

मांगलिक दोष कब बनता है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, निम्नलिखित स्थितियों में मांगलिक दोष उत्पन्न होता है:

  1. जन्म कुंडली के भावों में मंगल की स्थिति:
  • प्रथम भाव (लग्न): जब मंगल पहले भाव में हो
  • चतुर्थ भाव: जब मंगल चौथे भाव में स्थित हो
  • सप्तम भाव: जब मंगल सातवें भाव (विवाह भाव) में हो
  • अष्टम भाव: जब मंगल आठवें भाव में उपस्थित हो
  • द्वादश भाव: जब मंगल बारहवें भाव में विराजमान हो
  1. विभिन्न लग्नों से मंगल की स्थिति: कुछ ज्योतिषाचार्य मंगल दोष को तीन अलग-अलग लग्नों से भी देखते हैं:
  • चंद्र लग्न से
  • सूर्य लग्न से
  • शुक्र लग्न से

प्रत्येक भाव में मंगल के विशेष प्रभाव:

प्रथम भाव में मंगल: इस स्थिति में व्यक्ति के स्वभाव में क्रोध, अस्थिरता, आवेग और जिद्दीपन की प्रवृत्ति आती है। ऐसे व्यक्ति आत्मविश्वास से भरे और तेजस्वी होते हैं, लेकिन अधीरता उनकी कमजोरी बन सकती है।

चतुर्थ भाव में मंगल: यह स्थिति मानसिक शांति, माता से संबंध और घरेलू सुख को प्रभावित करती है। वाहन दुर्घटना और संपत्ति संबंधी विवादों की संभावना रहती है।

सप्तम भाव में मंगल: यह स्थिति सबसे अधिक प्रभावशाली मानी जाती है क्योंकि सातवां भाव विवाह और जीवनसाथी का होता है। इससे वैवाहिक जीवन में मतभेद, झगड़े और अलगाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

अष्टम भाव में मंगल: यह स्थिति जीवनसाथी के स्वास्थ्य और आयु पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। इसके अलावा गुप्त रोग, आर्थिक संकट और अचानक हानि की संभावना बढ़ जाती है।

द्वादश भाव में मंगल: यह स्थिति मानसिक तनाव, आर्थिक अस्थिरता, खर्चों में वृद्धि और वैवाहिक असंतोष का कारण बनती है।

मांगलिक दोष के दुष्प्रभाव और संकेत

मांगलिक दोष के कारण जीवन में निम्नलिखित समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं:

वैवाहिक जीवन पर प्रभाव:

  • विवाह में देरी: मांगलिक व्यक्ति के विवाह में अकारण विलंब होता है
  • रिश्तों का टूटना: विवाह के प्रयास बार-बार असफल होते हैं
  • दांपत्य जीवन में कलह: पति-पत्नी के बीच लगातार मतभेद और झगड़े
  • असंतोष और तनाव: वैवाहिक जीवन में शांति और सुख का अभाव
  • अलगाव या तलाक: गंभीर स्थिति में विवाह विच्छेद की स्थिति

स्वास्थ्य पर प्रभाव:

  • जीवनसाथी को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं
  • दुर्घटना का भय
  • रक्त संबंधी विकार
  • मानसिक तनाव और अवसाद

आर्थिक और पारिवारिक प्रभाव:

  • करियर में रुकावटें और संघर्ष
  • आर्थिक अस्थिरता
  • परिवार में तनावपूर्ण वातावरण
  • भाई-बहन से संबंधों में खटास

सकारात्मक पहलू:

यह जानना महत्वपूर्ण है कि मांगलिक दोष केवल नकारात्मक ही नहीं होता। मांगलिक व्यक्ति अत्यधिक तेजस्वी, कर्मठ, पराक्रमी और सफल होते हैं। वे प्रशासनिक पदों, सैन्य सेवा, चिकित्सा क्षेत्र, पुलिस और खेल जगत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं। उनमें अद्भुत ऊर्जा, साहस और नेतृत्व क्षमता होती है।

मांगलिक दोष की काट के प्रभावी उपाय

अब आते हैं सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न पर – मांगलिक दोष की काट के उपाय क्या हैं? ज्योतिष शास्त्र में इस दोष के निवारण के लिए अनेक प्रभावी उपाय बताए गए हैं:

1. उज्जैन में मंगल दोष पूजा: सबसे प्रभावी और असरदार उपाय

उज्जैन में मंगल दोष पूजा को मांगलिक दोष के निवारण का सर्वश्रेष्ठ और रामबाण उपाय माना जाता है। उज्जैन मध्य प्रदेश में स्थित एक पवित्र धार्मिक नगरी है जहां महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं।

क्यों है उज्जैन विशेष?

  • उज्जैन को मंगल ग्रह का जन्मस्थान माना जाता है
  • यहां स्थित मंगलनाथ मंदिर विश्व प्रसिद्ध है
  • इस मंदिर में मंगल देव की विशेष पूजा होती है
  • यहां की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है

पूजा विधि:

  • योग्य और अनुभवी पंडित द्वारा विधिवत पूजा
  • मंगल बीज मंत्र का जाप: “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः” (कम से कम 11,000 बार)
  • मंगल शांति हवन
  • पूर्णाहुति और प्रसाद वितरण

उज्जैन में अन्य महत्वपूर्ण पूजाएं:

  • महाकालेश्वर रुद्राभिषेक
  • नवग्रह शांति पूजा
  • कालसर्प दोष निवारण

उज्जैन के अनुभवी पंडितों से संपर्क करके आप अपनी मंगल दोष पूजा बुक करा सकते हैं।

2. कुंभ विवाह और पीपल विवाह (भात पूजन)

यह एक प्राचीन और अत्यंत प्रभावी परंपरागत उपाय है जो विशेष रूप से गंभीर मांगलिक दोष की स्थिति में किया जाता है।

कुंभ विवाह क्या है? इस विधि में मांगलिक व्यक्ति का वास्तविक विवाह से पहले एक प्रतीकात्मक विवाह करवाया जाता है। यह विवाह निम्नलिखित से किया जाता है:

  • मिट्टी के घड़े (कुंभ) से
  • पीपल के वृक्ष से
  • भगवान विष्णु की मूर्ति से
  • केले के पेड़ से

विधि:

  • पूर्ण वैदिक रीति-रिवाज से विवाह संस्कार
  • मंत्रोच्चारण और फेरे
  • विवाह के बाद घड़े को तोड़ना या पीपल में जल चढ़ाना
  • यह माना जाता है कि मंगल का दोष इस प्रतीकात्मक विवाह पर समाप्त हो जाता है

लागत: 2,500 से 5,100 रुपये या अधिक

सर्वोत्तम समय: 28 वर्ष की आयु के बाद (जब मंगल दोष स्वयं कमजोर हो जाता है)

3. मंगल ग्रह की शांति के लिए विशेष पूजा और हवन

किसी योग्य पंडित या ज्योतिषाचार्य से मंगल ग्रह की शांति पूजा करवाना अत्यंत लाभकारी होता है।

पूजा स्थान:

  • हनुमान मंदिर में
  • नवग्रह मंदिर में
  • त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग में
  • उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर में

पूजा में शामिल:

  • मंगल यंत्र की स्थापना
  • वैदिक मंत्रों का जाप
  • हवन और आहुति
  • ब्राह्मण भोजन
  • दान और दक्षिणा

4. मंगल बीज मंत्र का नियमित जाप

मंत्र जाप मांगलिक दोष को शांत करने का सबसे सरल और शक्तिशाली उपाय है।

मुख्य मंत्र: “ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः”

अन्य प्रभावी मंत्र:

  • “ॐ अं अंगारकाय नमः”
  • “ॐ भौमाय नमः”

जाप विधि:

  • प्रतिदिन 108 बार या इससे अधिक
  • तुलसी या रुद्राक्ष की माला से
  • सुबह के समय या मंगलवार को विशेष
  • स्वच्छ वस्त्र पहनकर
  • पूर्व या उत्तर दिशा में मुख करके
  • शांत और एकांत स्थान में

5. मंगलवार का व्रत और हनुमान पूजा

मंगलवार का दिन मंगल ग्रह और भगवान हनुमान को समर्पित है। इस दिन का व्रत और हनुमान जी की पूजा अत्यंत फलदायी होती है।

व्रत विधि:

  • सूर्योदय से सूर्यास्त तक व्रत
  • शाकाहारी और सात्विक भोजन
  • तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन) का त्याग
  • क्रोध और अहंकार से दूरी

पूजा विधि:

  • हनुमान जी की प्रतिमा की पूजा
  • चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर चोला चढ़ाएं
  • लाल फूल अर्पित करें
  • गुड़ और चने का भोग लगाएं
  • धूप-दीप से आरती

पाठ:

  • हनुमान चालीसा का पाठ
  • सुंदरकांड का पाठ
  • बजरंग बाण का पाठ
  • इनमें से किसी एक का नियमित पाठ भी लाभकारी

6. रत्न धारण: लाल मूंगा (प्रवाल)

मंगल ग्रह का प्रतिनिधि रत्न लाल मूंगा (Coral/Moonga) है। यह रत्न मंगल की सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है और नकारात्मक प्रभावों को कम करता है।

महत्वपूर्ण सावधानियां:

  • रत्न धारण करने से पहले किसी अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें
  • गलत रत्न धारण करने से विपरीत प्रभाव हो सकता है
  • प्रामाणिक और प्राकृतिक मूंगा ही प्रयोग करें

धारण विधि:

  • तांबे या सोने की अंगूठी में जड़वाएं
  • अनामिका उंगली (Ring finger) में पहनें
  • मंगलवार के दिन प्रातःकाल धारण करें
  • पहले मंत्रों से अभिमंत्रित करवाएं
  • पूजा के बाद ही पहनें

वजन: आपके शरीर के वजन के अनुसार (सामान्यतः 3 से 7 रत्ती)

7. मंगलवार को दान और उपाय

मंगल ग्रह से संबंधित वस्तुओं का दान करना अत्यंत शुभ और फलदायी होता है।

दान करने योग्य वस्तुएं:

  • लाल रंग के वस्त्र या कपड़े
  • मसूर की दाल
  • तांबे के बर्तन या सिक्के
  • गुड़
  • चना या बूंदी
  • लाल फूल
  • केसर
  • लाल मिर्च

दान विधि:

  • मंगलवार के दिन सूर्योदय के समय
  • किसी जरूरतमंद, गरीब या ब्राह्मण को
  • श्रद्धा और विनम्रता से
  • दक्षिणा सहित

8. हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ

नियमित पाठ से मंगल ग्रह का प्रकोप शांत होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

पाठ के लाभ:

  • मानसिक शांति
  • साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि
  • बाधाओं का निवारण
  • मंगल दोष का प्रभाव कम होना

नियमित पाठ:

  • प्रतिदिन सुबह और शाम
  • मंगलवार को विशेष पाठ
  • 40 दिनों तक निरंतर पाठ (संकल्प लेकर)

9. मंगल यंत्र की स्थापना और पूजा

मंगल यंत्र एक विशेष ज्यामितीय आकृति है जो मंगल ग्रह की ऊर्जा को संतुलित करती है।

स्थापना विधि:

  • तांबे की प्लेट पर बना हुआ यंत्र
  • पूजा स्थान में स्थापित करें
  • मंगलवार को स्थापना करें
  • नियमित रूप से पूजा और धूप-दीप

यंत्र के लाभ:

  • मंगल की नकारात्मक ऊर्जा का शमन
  • घर में सकारात्मकता
  • मानसिक शांति

10. नीम का पेड़ लगाना

यह एक सरल लेकिन प्रभावी उपाय है।

विधि:

  • विवाह से पहले नीम का पौधा लगाएं
  • कम से कम 43 दिनों तक उसकी देखभाल करें
  • नियमित रूप से पानी दें
  • पेड़ से प्रेम और सम्मान का भाव रखें

11. सफेद सुरमा लगाना

उपाय:

  • 43 दिनों तक लगातार सफेद सुरमा आंखों में लगाएं
  • इससे मंगल दोष का प्रभाव कम होता है

12. मेहमानों को मिठाई खिलाना

विधि:

  • घर आए अतिथियों का सम्मान करें
  • उन्हें मिठाई और भोजन खिलाएं
  • इससे सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है

13. नवरात्रि और विशेष दिनों पर पूजा

विशेष अवसर:

  • नवरात्रि के दौरान नवग्रह शांति पूजा
  • चैत्र मास में विशेष अनुष्ठान
  • मंगलवार को विशेष व्रत और पूजा

मांगलिक दोष के निरस्तीकरण के सूत्र

यह जानना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि हर मांगलिक व्यक्ति पर मंगल दोष का समान प्रभाव नहीं होता। ज्योतिष शास्त्र में मांगलिक दोष को निरस्त करने के लगभग 1000 से अधिक सूत्र बताए गए हैं। यहां कुछ प्रमुख स्थितियां दी जा रही हैं जिनमें मांगलिक दोष निरस्त हो जाता है:

1. दोनों कुंडलियों में मांगलिक दोष

यदि वर और वधू दोनों की कुंडली में मांगलिक दोष हो, तो दोनों का मांगलिक दोष एक-दूसरे को संतुलित कर देता है। यह सबसे सरल और प्रभावी समाधान है। लोहा लोहे को काटता है – यह कहावत यहां पूरी तरह सही बैठती है।

2. मंगल की स्व राशि स्थिति

जब मंगल अपनी स्वयं की राशि (मेष या वृश्चिक) में स्थित हो, तो दोष कमजोर हो जाता है क्योंकि शास्त्र कहता है – “अपने घर को कोई नहीं उजाड़ता”

3. गुरु का प्रभाव

  • मंगल के साथ गुरु (बृहस्पति) की युति हो
  • गुरु केंद्र में स्थित हों
  • गुरु की दृष्टि मंगल पर पड़ रही हो

4. राहु-मंगल की युति

जब मंगल के साथ राहु विराजमान हो, तो मांगलिक दोष निरस्त माना जाता है।

5. चंद्रमा का केंद्र में होना

यदि चंद्रमा केंद्र (1, 4, 7, 10) भाव में स्थित हों, तो मंगल दोष कमजोर हो जाता है।

6. पाप ग्रहों की उपस्थिति

यदि उन्हीं भावों में अन्य पाप ग्रह (राहु, केतु, शनि, सूर्य) उपस्थित हों जहां मंगल दोष बनता है, तो दोष निरस्त हो जाता है क्योंकि पाप ग्रह भी मंगल के समान प्रभाव देते हैं।

7. आयु सीमा

28 वर्ष की आयु के बाद कुछ कुंडलियों में मांगलिक दोष का प्रभाव स्वतः कम हो जाता है।

8. विशेष राशियां

मेष, कर्क और वृश्चिक राशि वालों में मांगलिक दोष जीवनभर के लिए नहीं रहता।

मांगलिक दोष की जांच कैसे कराएं?

मांगलिक दोष के संबंध में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले निम्नलिखित बातें ध्यान रखें:

1. कुंडली की सही जांच करवाएं

  • किसी अनुभवी और प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य से परामर्श लें
  • जन्म समय, तिथि और स्थान की सही जानकारी दें
  • केवल सॉफ्टवेयर या ऑनलाइन रिपोर्ट पर निर्भर न रहें

2. मंगल की डिग्री और स्थिति की जांच

  • मंगल किस भाव में है
  • मंगल की डिग्री क्या है
  • किन ग्रहों के साथ युति है
  • किन भावों को दृष्टि दे रहा है
  • किस राशि में स्थित है

3. दोष की तीव्रता जानें

हर मांगलिक दोष समान रूप से हानिकारक नहीं होता। कुछ में यह बहुत हल्का होता है जबकि कुछ में गंभीर। अतः दोष की तीव्रता का सही आकलन आवश्यक है।

4. निरस्तीकरण सूत्रों की जांच

योग्य ज्योतिषी से जांच करवाएं कि आपकी कुंडली में मांगलिक दोष के निरस्तीकरण के कोई योग तो नहीं हैं।

विवाह में मांगलिक दोष की शांति क्यों जरूरी है?

वैवाहिक जीवन मानव जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील पहलू है। यदि विवाह से पहले मांगलिक दोष की शांति नहीं की जाती, तो निम्नलिखित समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं:

  • दांपत्य जीवन में कलह: लगातार झगड़े और मतभेद
  • समझ का अभाव: एक-दूसरे की भावनाओं को न समझ पाना
  • अलगाव की स्थिति: गंभीर मामलों में तलाक तक की नौबत
  • स्वास्थ्य समस्याएं: जीवनसाथी को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां
  • आर्थिक संकट: पारिवारिक आर्थिक स्थिति पर प्रभाव
  • संतान सुख में बाधा: संतान प्राप्ति में कठिनाई

इन सभी समस्याओं से बचने के लिए विवाह से पूर्व योग्य पंडित से मांगलिक दोष की शांति के उपाय करवाना अत्यंत आवश्यक है।

मांगलिक व्यक्तियों के लिए विशेष सुझाव

1. सकारात्मक दृष्टिकोण रखें

मांगलिक होना कोई अभिशाप नहीं है। मांगलिक व्यक्ति अत्यधिक ऊर्जावान, साहसी और सफल होते हैं। अपनी इस ऊर्जा को सही दिशा में लगाएं।

2. उपयुक्त करियर चुनें

मांगलिक व्यक्तियों के लिए निम्नलिखित क्षेत्र अत्यंत उपयुक्त हैं:

  • सैन्य सेवा
  • पुलिस और प्रशासनिक सेवाएं
  • चिकित्सा क्षेत्र (विशेषकर सर्जन)
  • खेल जगत
  • इंजीनियरिंग
  • उद्योग और व्यापार

3. स्वभाव पर नियंत्रण

  • क्रोध पर नियंत्रण रखें
  • जिद्दीपन को लचीलेपन में बदलें
  • धैर्य और संयम का अभ्यास करें
  • योग और ध्यान का नियमित अभ्यास

4. नियमित आध्यात्मिक अभ्यास

  • प्रतिदिन पूजा-पाठ
  • मंत्र जाप
  • हनुमान चालीसा का पाठ
  • सकारात्मक विचारों का संचय

कुंडली मिलान में मांगलिक दोष की भूमिका

विवाह से पहले कुंडली मिलान में मांगलिक दोष की जांच सबसे पहले की जाती है। यहां कुछ महत्वपूर्ण बिंदु हैं:

1. दोनों कुंडलियों का मिलान

केवल एक पक्ष की कुंडली देखकर निर्णय नहीं लिया जा सकता। वर और वधू दोनों की कुंडलियों का सम्मिलित अध्ययन आवश्यक है।

2. गुण मिलान के साथ मांगलिक दोष

36 गुणों के मिलान के साथ-साथ मांगलिक दोष की जांच भी अनिवार्य है।

3. अन्य दोषों की जांच

मांगलिक दोष के साथ-साथ कालसर्प दोष, नाड़ी दोष, भकूट दोष आदि की भी जांच करवानी चाहिए।

आधुनिक समय में मांगलिक दोष की प्रासंगिकता

आज के आधुनिक युग में कई लोग मांगलिक दोष को अंधविश्वास मानते हैं। हालांकि, हजारों वर्षों से चली आ रही यह परंपरा और ज्योतिष शास्त्र का गहन ज्ञान पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता।

संतुलित दृष्टिकोण:

  • ज्योतिष को मार्गदर्शक के रूप में स्वीकारें
  • अंधविश्वास से बचें
  • योग्य ज्योतिषी से परामर्श लें
  • उपायों को श्रद्धा और विश्वास से करें
  • अपने कर्मों पर भी ध्यान दें

निष्कर्ष

मांगलिक दोष की काट के उपाय अनेक हैं और सभी अत्यंत प्रभावी हैं। मांगलिक दोष कोई भयावह या अपरिहार्य समस्या नहीं है। सही ज्ञान, योग्य मार्गदर्शन और श्रद्धापूर्वक किए गए उपायों से इस दोष के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है और एक सुखी वैवाहिक जीवन की नींव रखी जा सकती है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले अपनी कुंडली की सही जांच किसी अनुभवी और प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य से अवश्य करवाएं। कई बार मांगलिक दोष होता ही नहीं है या वह स्वतः निरस्त हो चुका होता है।

याद रखें, मांगलिक होना एक विशेषता है जो आपको अद्भुत ऊर्जा, साहस और सफलता प्रदान करती है। इस ऊर्जा को सही दिशा में लगाएं, नियमित उपाय करें और सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखें। आपका जीवन निश्चित रूप से खुशहाल और समृद्ध होगा।

अंतिम सुझाव:

  • घबराएं नहीं, सही जानकारी प्राप्त करें
  • योग्य ज्योतिषी से परामर्श लें
  • विवाह से पूर्व उचित उपाय करें
  • नियमित रूप से पूजा-पाठ और मंत्र जाप करें
  • सकारात्मक जीवनशैली अपनाएं
  • अपने गुणों को पहचानें और उन्हें निखारें

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