पूजा करते समय किस दिशा में होना चाहिए मुख? जानें सही दिशा के महत्व को

पूजा करते समय सही दिशा में होना चाहिए मुख, वास्तु अनुसार पूजा के लाभ
पूजा करने वाले का मुख किस दिशा में होना चाहिए

क्यों महत्वपूर्ण है पूजा की दिशा? भारतीय संस्कृति में पूजा-पाठ सिर्फ एक धार्मिक क्रिया नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करने का माध्यम है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गलत दिशा में पूजा करना आपकी मेहनत को बेकार बना सकता है?

जी हां! वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूजा करते समय आपकी और भगवान की मूर्ति की दिशा का विशेष महत्व है। सही दिशा घर में सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और शांति लाती है, जबकि गलत दिशा अशुभ प्रभाव डाल सकती है।

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि पूजा करने वाले का मुख किस दिशा में होना चाहिए, घर में मंदिर कहां बनाएं, और कौन-कौन सी सावधानियां बरतें।

पूजा करते समय आपका मुख किस दिशा में होना चाहिए?

1. पूर्व दिशा – सर्वोत्तम विकल्प

पूर्व दिशा को पूजा के लिए सबसे शुभ माना गया है। पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करने से श्रेष्ठ फल प्राप्त होते हैं।

क्यों है पूर्व दिशा शुभ?

  • सूर्य पूर्व से उगता है, जो ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है
  • यह दिशा देवेंद्र और सूर्य देव से जुड़ी है
  • इस दिशा में पूजा करने से समृद्धि और धन की प्राप्ति होती है
  • वैज्ञानिक दृष्टि से भी सूर्य की पहली किरणें इसी दिशा से आती हैं

व्यवस्था: इसके लिए भगवान की मूर्ति को पश्चिम दिशा में रखें, ताकि आपका मुख पूर्व की ओर हो।

2. पश्चिम दिशा – बेहद फलदायी

पश्चिम दिशा की ओर मुख करके पूजा करना बेहद शुभ फलदायी माना जाता है।

पश्चिम दिशा के लाभ

  • यह दिशा वरुण देव द्वारा शासित है
  • घर में सकारात्मकता और सौहार्द बना रहता है
  • नकारात्मक विचारों का नाश होता है

व्यवस्था: इसके लिए पूजा स्थल का द्वार पूर्व की ओर होना चाहिए, और भगवान की मूर्ति पूर्व दिशा में रखें।

3. उत्तर दिशा – पुजारी के लिए उपयुक्त

यदि कोई पूजा कराने वाला (पंडित जी) है, तो उनका मुख उत्तर की ओर होना चाहिए।

उत्तर दिशा का महत्व

  • धन के देवता कुबेर की दिशा है
  • धन-धान्य की वृद्धि होती है
  • समृद्धि और विकास में सहायक

किस दिशा में मुख करके पूजा करना अशुभ है?

दक्षिण दिशा – पूरी तरह वर्जित!

वास्तु शास्त्र में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पूजा करना सख्त मना है। दक्षिण दिशा मृत्यु के देवता यम से जुड़ी है।

दक्षिण दिशा के नकारात्मक प्रभाव

  • अशांति और नकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि
  • घर में वास्तु दोष
  • आर्थिक समस्याएं
  • सकारात्मक ऊर्जा का अवरुद्ध होना

ध्यान दें: भगवान की मूर्ति को कभी भी उत्तर दिशा में न रखें, क्योंकि इससे आप दक्षिण की ओर मुख करके पूजा करेंगे।

भगवान की मूर्ति किस दिशा में रखें?

मूर्ति रखने के मुख्य नियम
  1. पश्चिम दिशा में मूर्ति (सर्वोत्तम)
  • भगवान का मुख पश्चिम की ओर रखें
  • पूजा करते समय आप पूर्व दिशा की ओर मुख करेंगे
  • यह व्यवस्था समृद्धि और शांति लाती है
  1. पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मूर्ति
  • मूर्तियों को पूर्व या उत्तर की ओर भी रख सकते हैं
  • इससे सकारात्मकता और प्रार्थना की गुणवत्ता बढ़ती है
  • ये दिशाएं समृद्धि से जुड़ी हैं
  1. मूर्ति की ऊंचाई
  • मूर्तियां बैठकर प्रार्थना करने वाले व्यक्ति के हृदय के साथ संरेखित हों
  • आदर्श ऊंचाई: 32 से 36 इंच
  • न बहुत ऊंचा, न बहुत नीचा
  1. दीवार से दूरी
  • मूर्तियों को दीवार से 1-2 इंच की दूरी पर रखें
  • इससे हवा और ऊर्जा का उचित प्रवाह होता है
  • साफ-सफाई करने में भी आसानी

घर में मंदिर किस दिशा में बनाएं?

ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) – सबसे शुभ

क्यों है ईशान कोण सर्वोत्तम?

  • भगवान शिव का निवास स्थान माना जाता है
  • बृहस्पति ग्रह से जुड़ा है
  • जल तत्व का प्रतिनिधित्व करता है
  • सूर्य की पहली किरणें यहां पड़ती हैं
  • पृथ्वी का झुकाव भी इसी दिशा में है
  • पूरे घर की ऊर्जा को खींचता और संचारित करता है
अन्य शुभ स्थान

घर का केंद्र (ब्रह्मस्थान)

  • ऊर्जा का सबसे मजबूत केंद्र
  • समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य का वास

पूर्व दिशा

  • सूर्य और देवेंद्र की दिशा
  • धन और समृद्धि की प्राप्ति

उत्तर दिशा

  • कुबेर की दिशा
  • धन-धान्य में वृद्धि

पश्चिम दिशा

  • यदि अन्य दिशाएं उपलब्ध न हों
  • व्यावहारिक विकल्प के रूप में उपयुक्त

कहां न बनाएं मंदिर? महत्वपूर्ण सावधानियां

वर्जित दिशाएं और स्थान
  1. दक्षिण दिशा
  • अशुभ मानी जाती है
  • मृत्यु के देवता यम से संबंधित
  • आर्थिक समस्याओं का कारक
  1. दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण)
  • अग्नि तत्व से जुड़ा
  • रसोई के लिए उपयुक्त, मंदिर के लिए नहीं
  • आर्थिक दिक्कतों का कारण बन सकता है

अपवाद: कुछ विशेषज्ञों के अनुसार, देवी दुर्गा की पूजा के लिए यह दिशा उपयुक्त हो सकती है।

  1. दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण)
  • राहु ग्रह से जुड़ा
  • स्थिरता का प्रतीक, लेकिन पूजा के लिए अनुकूल नहीं
  • ऊर्जा प्रवाह बाधित होता है
इन स्थानों पर मंदिर न बनाएं
  • बेसमेंट में
  • सीढ़ियों के नीचे
  • मुख्य द्वार के सामने
  • शौचालय के पास या ऊपर
  • बेडरूम में (यदि अनिवार्य हो तो बंद कैबिनेट में)

घर के मंदिर में क्या रखें और क्या न रखें?

रखने योग्य वस्तुएं
  • दीपक और दीये
  • ताजे फूल
  • देवी-देवताओं की मूर्तियां या चित्र
  • अगरबत्ती और धूप
  • पवित्र धार्मिक पुस्तकें (गीता, रामायण)
  • पूजा की थाली और सामग्री
  • घंटी
वर्जित वस्तुएं
  • मृतकों और पूर्वजों के चित्र (दक्षिण दिशा में रखें)
  • जानवरों की खाल या चमड़े की वस्तुएं
  • धन-संपत्ति या गहने
  • क्रोधित रूप के देवताओं की तस्वीरें (विशेष अवसरों को छोड़कर)
  • टूटी या क्षतिग्रस्त मूर्तियां
  • अनावश्यक सामान और अव्यवस्था
  • एक ही भगवान की दो समान मूर्तियां

विशिष्ट देवताओं के लिए दिशा निर्देश

भगवान गणेश
  • देवी लक्ष्मी की बाईं ओर रखें
  • उत्तर दिशा में, दक्षिण की ओर मुख करके भी रख सकते हैं
देवी सरस्वती
  • देवी लक्ष्मी के दाहिने तरफ रखें
शिवलिंग
  • उत्तरी भाग में रखें
  • केवल छोटे आकार का घर में रखें
भगवान हनुमान
  • हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखें
  • यह एकमात्र अपवाद है
देवी दुर्गा और कुबेर
  • उत्तर दिशा में, दक्षिण की ओर मुख करके रखें
भगवान कार्तिकेय
  • पूर्व दिशा की ओर मुख करके रखें
सूर्य, ब्रह्मा, विष्णु, महेश
  • पूर्व दिशा की ओर मुख करना उत्तम

मंदिर का रंग और सामग्री

शुभ रंग
  • सफेद – पवित्रता का प्रतीक
  • नारंगी – आध्यात्मिक ऊर्जा
  • क्रीम और हल्का पीला – शांति
  • हल्का नीला – शांत वातावरण
  • लैवेंडर – ध्यान में सहायक
  • बेज – संतुलन
बचने योग्य रंग
  • काला – नकारात्मकता का प्रतीक
  • गहरा भूरा – भारीपन का एहसास
निर्माण सामग्री
  • लकड़ी – पारंपरिक और शुभ
  • संगमरमर (मार्बल) – पवित्रता का प्रतीक
  • ग्रेनाइट – टिकाऊ और शुभ

मंदिर रख रखाव के महत्वपूर्ण टिप्स

1. स्वच्छता सर्वोपरि
  • नियमित सफाई अनिवार्य है
  • मूर्तियों को धीरे से पोंछें
  • रोज धूल साफ करें
  • ताजे फूल रखें, मुरझाए फूल तुरंत हटाएं
  • कपड़े नियमित रूप से बदलें
2. प्रकाश व्यवस्था
  • सूर्य की रोशनी जरूर पहुंचे
  • प्राकृतिक प्रकाश वातावरण को पवित्र बनाता है
  • रात में दीया अवश्य जलाएं
  • नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है
3. घंटी बजाना
  • पूजा के बाद घंटी जरूर बजाएं
  • एक बार पूरे घर में घूमकर घंटी बजाएं
  • घंटी की आवाज नकारात्मकता नष्ट करती है
4. नियमित पूजा
  • सुबह और शाम नियमित पूजा करें
  • धूप और अगरबत्ती जलाएं
  • शांत वातावरण बनाए रखें
5. भक्ति भाव
  • भक्ति और इरादे से मंदिर स्थापित करें
  • मंदिर को प्रमुखता और सम्मान दें
  • अव्यवस्था से बचें

मंदिर की दिशा कैसे तय करें? व्यावहारिक तरीका

चुंबकीय कंपास विधि
  • कंपास लें – मोबाइल ऐप भी काम आता है
  • घर के केंद्र में खड़े हों
  • दिशाओं की पहचान करें
  • मुख्य प्रवेश द्वार देखें – जहां से सकारात्मक ऊर्जा आती है
  • ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) की पहचान करें
  • वहां मंदिर की योजना बनाएं

वैज्ञानिक दृष्टिकोण: क्यों मायने रखती है दिशा?

सूर्य की ऊर्जा
  • पूर्व दिशा से सूर्य की पहली किरणें आती हैं
  • विटामिन D का प्राकृतिक स्रोत
  • सकारात्मक ऊर्जा और जीवनशक्ति
पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र
  • उत्तर-पूर्व दिशा में पृथ्वी का झुकाव
  • ऊर्जा प्रवाह की दिशा
  • ध्यान और एकाग्रता में सहायक
वायु प्रवाह
  • उत्तर-पूर्व से ताजी हवा का प्रवेश
  • स्वास्थ्य के लिए लाभदायक
  • वातावरण को शुद्ध रखता है

निष्कर्ष

पूजा करने वाले का मुख पूर्व या पश्चिम दिशा में होना सबसे शुभ माना गया है। वास्तु शास्त्र केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि प्रकृति की ऊर्जा के साथ संरेखण का विज्ञान है।

मुख्य बिंदु याद रखें
  • पूर्व या पश्चिम दिशा में मुख करके पूजा करें
  • ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में मंदिर बनाएं
  • दक्षिण दिशा से बचें
  • नियमित सफाई और भक्ति भाव बनाए रखें
  • सूर्य की रोशनी अवश्य पहुंचे
  • अव्यवस्था से बचें

जब आप सही दिशा में पूजा करते हैं, तो ब्रह्मांडीय ऊर्जा सामंजस्य में प्रवाहित होती है। आपकी प्रार्थनाएं अधिक शक्तिशाली बन जाती हैं, और घर में सुख-शांति का वास होता है।

याद रखें: सबसे महत्वपूर्ण है आपका भक्ति भाव और श्रद्धा। दिशा भक्ति का मूक साथी है – इसे बुद्धिमानी से चुनें, लेकिन अपने विश्वास को सर्वोपरि रखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: पूजा करते समय कौन सी दिशा सबसे शुभ है?

उत्तर: पूर्व दिशा की ओर मुख करके पूजा करना सर्वोत्तम है। पश्चिम दिशा भी बेहद शुभ मानी जाती है।

प्रश्न 2: क्या उत्तर दिशा की ओर मुख करके पूजा कर सकते हैं?

उत्तर: हां, यदि आप पूजा करा रहे हैं (पंडित) तो उत्तर दिशा उपयुक्त है। लेकिन भगवान की मूर्ति उत्तर में न रखें।

प्रश्न 3: दक्षिण दिशा में पूजा क्यों वर्जित है?

उत्तर: दक्षिण दिशा मृत्यु के देवता यम से जुड़ी है, जो नकारात्मक ऊर्जा और अशांति लाती है।

प्रश्न 4: घर में मंदिर के लिए सबसे अच्छी जगह कौन सी है?

उत्तर: ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) सबसे शुभ है। इसके बाद पूर्व और उत्तर दिशा उपयुक्त हैं।

प्रश्न 5: क्या शयनकक्ष में मंदिर रख सकते हैं?

उत्तर: नहीं, यह अशुद्ध माना जाता है। यदि अनिवार्य हो तो बंद कैबिनेट में रखें और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।

प्रश्न 6: भगवान हनुमान की मूर्ति किस दिशा में रखें?

उत्तर: भगवान हनुमान की मूर्ति हमेशा दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रखनी चाहिए।

प्रश्न 7: मंदिर में पूर्वजों के फोटो रख सकते हैं?

उत्तर: नहीं, मंदिर में मृतकों के चित्र नहीं रखने चाहिए। इन्हें दक्षिण दिशा की दीवार पर रखें।

अस्वीकरण: यह लेख वास्तु शास्त्र के सामान्य सिद्धांतों और विशेषज्ञों की सलाह पर आधारित है। वास्तु परामर्श के लिए किसी प्रमाणित वास्तु विशेषज्ञ से संपर्क करें। सबसे महत्वपूर्ण है आपकी श्रद्धा और भक्ति भाव।

आगे पढ़ें:

पति पत्नी के अच्छे रिश्ते के लिए प्रभावी मंत्र हिंदी में

पति को वश में करने के उपाय

फोटो से वशीकरण

पत्नी से तलाक लेने का वशीकरण मंत्र

तुम्हें कैसे पता चलेगा कि कोई मुझ पर वशीकरण कर रहा है

Scroll to Top