
विवाह हिंदू संस्कृति में सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण संस्कारों में से एक है। जब बात प्रेम विवाह की आती है, तो कई बार परिवार की असहमति, कुंडली दोष, सामाजिक बाधाएं या अन्य अज्ञात समस्याएं रास्ते में आ जाती हैं। ऐसे समय में भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य मंत्रों की शरण लेना अत्यंत लाभकारी सिद्ध होता है।
भगवान शिव और माता पार्वती की प्रेम कहानी हिंदू पुराणों में सबसे प्रेरणादायक और आदर्श प्रेम की मिसाल है। माता पार्वती ने स्वयं कठोर तपस्या करके भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था। इसी कारण शिव-पार्वती के मंत्र विवाह, विशेष रूप से प्रेम विवाह की सफलता के लिए सर्वाधिक शक्तिशाली माने जाते हैं।
इस विस्तृत लेख में हम शिव पार्वती मंत्रों की संपूर्ण जानकारी, उनके लाभ, जाप विधि, और प्रेम विवाह में सफलता पाने के उपाय विस्तार से जानेंगे।
भगवान शिव और माता पार्वती की अमर प्रेम कहानी
सती और शिव: प्रथम जन्म की कथा
भगवान शिव की पहली पत्नी माता सती थीं, जो राजा दक्ष की पुत्री थीं। सती का शिव से विवाह दक्ष को स्वीकार नहीं था। एक बार दक्ष ने एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया और जानबूझकर भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया। इस अपमान को सहन न कर पाने के कारण माता सती ने यज्ञ की अग्नि में आत्मदाह कर लिया।
सती की मृत्यु से व्यथित होकर भगवान शिव ने संसार से विरक्ति ले ली और हिमालय में गहन ध्यान में लीन हो गए। उनके क्रोध से विरभद्र का जन्म हुआ जिसने दक्ष के यज्ञ का विनाश कर दिया।
पार्वती का जन्म और कठोर तपस्या
माता सती ने हिमालय राजा हिमवान और रानी मैनावती के घर पार्वती के रूप में पुनः जन्म लिया। बचपन से ही पार्वती को भगवान शिव से अटूट प्रेम था और उन्होंने उन्हें ही अपना पति बनाने का दृढ़ संकल्प लिया।
परंतु शिव ध्यान में इतने लीन थे कि उन्हें संसार की कोई चिंता नहीं थी। पार्वती ने उनका ध्यान आकर्षित करने के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की। उन्होंने:
- कठोर मौसम में खुले आसमान के नीचे ध्यान किया
- भोजन और जल का त्याग किया
- केवल शिव की आराधना में तल्लीन रहीं
- अपने शरीर की परवाह किए बिना वर्षों तपस्या जारी रखी
पार्वती की अटूट भक्ति और समर्पण से प्रभावित होकर भगवान शिव ने अंततः उन्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लिया।
दिव्य विवाह
शिव और पार्वती का विवाह सभी देवताओं, ऋषि-मुनियों की उपस्थिति में एक भव्य समारोह के रूप में संपन्न हुआ। यह विवाह चेतना (शिव) और शक्ति (पार्वती) के परम मिलन का प्रतीक है। उनका विवाह यह सिखाता है कि:
- सच्चा प्रेम धैर्य और समर्पण मांगता है
- कठिनाइयां प्रेम की परीक्षा होती हैं
- दृढ़ संकल्प से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है
- पति-पत्नी एक-दूसरे के पूरक होते हैं
अर्धनारीश्वर: पूर्ण एकता का प्रतीक
शिव और पार्वती के अर्धनारीश्वर रूप में आधा शरीर शिव का (पुरुष) और आधा पार्वती का (स्त्री) है। यह रूप दर्शाता है कि:
- स्त्री और पुरुष ऊर्जा एक-दूसरे के बिना अधूरी हैं
- विवाह में दोनों का समान महत्व है
- संतुलन और सामंजस्य ही सुखी वैवाहिक जीवन का आधार है
यही कारण है कि शिव-पार्वती मंत्र विवाह संबंधी सभी समस्याओं के लिए सर्वश्रेष्ठ माने जाते हैं।
स्वयंवरा पार्वती महामंत्र: विवाह का सबसे शक्तिशाली मंत्र
मंत्र की उत्पत्ति
स्वयंवरा पार्वती मंत्र संपूर्ण हिंदू मंत्र परंपरा में एकमात्र ऐसा मंत्र है जो विशेष रूप से विवाह के लिए समर्पित है। यह मंत्र महान ऋषि दुर्वासा द्वारा दिया गया था और स्वयं माता पार्वती ने भगवान शिव से विवाह करने के लिए इस मंत्र का जाप किया था। इसी कारण इसे स्वयंवरा पार्वती मंत्र कहा जाता है।
मूल मंत्र
“ॐ ह्रीं योगिनी योगिनी योगेश्वरी योग भयंकरी
सकल स्थावर जंगमस्य मुख हृदयम्
मम वशं आकर्ष आकर्षय नमः”
अनुवाद: “हे योगिनी, योगेश्वरी, योग भयंकरी, सभी चर-अचर प्राणियों के मुख और हृदय को मेरी ओर आकर्षित करो।”
मंत्र की शक्ति और महत्व
यह मंत्र न केवल विवाह में देरी को दूर करता है, बल्कि:
- विवाह में देरी: कुंडली दोष, सामाजिक बाधाएं, पारिवारिक विरोध आदि सभी ज्ञात-अज्ञात बाधाओं को दूर करता है
- प्रेम विवाह: इच्छित व्यक्ति से विवाह करने में सहायक (वशीकरण मंत्र के रूप में)
- तलाक रोकना: पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ाकर अलगाव या तलाक से बचाता है
- संतान प्राप्ति: दंपत्ति के बीच प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाकर संतान प्राप्ति में सहायक
- वैवाहिक सुख: पति-पत्नी के रिश्तों में मधुरता, यौन जीवन में सुधार, पारिवारिक सुख
स्वयंवरा पार्वती मंत्र जाप विधि
कौन कर सकता है यह मंत्र जाप?
यह मंत्र लिंग, जाति, धर्म, देश की परवाह किए बिना कोई भी व्यक्ति कर सकता है। यह सार्वभौमिक मंत्र है जो सभी के लिए समान रूप से प्रभावी है।
स्वयं मंत्र जाप करने की विधि
चरण 1: संकल्प लेना
देवी के सामने अपने नाम, गोत्र, नक्षत्र, राशि और समस्या का विवरण देते हुए शपथ लें कि आप 108 दिनों तक प्रतिदिन 1008 बार इस मंत्र का जाप करेंगे (कुल 1,00,008 जाप)। देवी से प्रार्थना करें कि वे आपकी समस्याओं को दूर करें और शीघ्र विवाह, संतान प्राप्ति, या वैवाहिक सुख प्रदान करें।
चरण 2: समय
प्रतिदिन लगभग 2 घंटे का समय लगता है 1008 जाप पूरे करने में।
चरण 3: पूजा सामग्री
प्रतिदिन निम्न सामग्री अर्पित करें:
- दीपक (घी या तेल का)
- धूप
- पुष्प (फूल)
- फल
- नैवेद्य (भोजन)
- ताम्बूल (पान और सुपारी)
- आरती
- नमस्कार
चरण 4: महत्वपूर्ण सावधानियां
- संकल्प भगवान के सामने शपथ है, बीच में न तोड़ें
- पहले कुछ दिन बिना संकल्प के अभ्यास करें यह देखने के लिए कि आप नियमित कर पाएंगे या नहीं
- मासिक धर्म के दौरान महिलाएं जाप को रोक सकती हैं और बाद में फिर शुरू कर सकती हैं
- जाप को कर्तव्य की तरह नहीं, प्रेम और भक्ति से करें
अन्य विकल्प
विकल्प 1: परिवार के सदस्यों या रिश्तेदारों की मदद लें
विकल्प 2: दो या अधिक लोग एक साथ एक ही समय और स्थान पर सामूहिक रूप से 1008 जाप कर सकते हैं
विकल्प 3: पेशेवर पुरोहित से करवाएं (यदि आप व्यस्त हैं या स्वास्थ्य कारणों से नहीं कर पाते)
प्रेम विवाह के लिए शिव पार्वती शाबर मंत्र
शाबर मंत्र अत्यंत शक्तिशाली और तीव्र प्रभाव वाले मंत्र होते हैं जो सामान्य भाषा में होते हैं और जल्दी परिणाम देते हैं।
शाबर मंत्र 1: इच्छित साथी से विवाह के लिए
मंत्र:
“ॐ गौरी आवे शिवजी ब्याहवे ‘अमुक’ को विवाह तुरंत सिद्ध करे देर ना करे जो देर होय तो शिव को त्रिशूल पड़े”
(‘अमुक’ की जगह उस व्यक्ति का नाम लें जिससे आप विवाह करना चाहते हैं)
जाप विधि:
- प्रारंभ दिन: शुक्ल पक्ष के बाद पहले गुरुवार से या अमावस्या के बाद पहले गुरुवार से शुरू करें
- पीले वस्त्र धारण करें
- देवी पार्वती और भगवान शिव की तस्वीर के सामने दीपक और अगरबत्ती जलाएं
- विवाह यंत्र स्थापित करें (यदि उपलब्ध हो)
- संमोहन माला से 5 माला (540 बार) प्रतिदिन जाप करें
- 21 दिनों तक लगातार जाप करें
- पूर्णाहुति के बाद कन्याओं या ब्राह्मणों को भोजन और उपहार दें
शाबर मंत्र 2: मखना हाथी शाबर मंत्र (अघोर मंत्र)
यह अत्यंत शक्तिशाली अघोर शाबर मंत्र है जो तेजी से परिणाम देता है।
मंत्र:
“तू देख पूरब उग्या सूरज देवता ॐ नमो नमः अब हम देखा पश्चिम
मस्त चलंता मखना हाथी त्तेते सोहे जर्द अम्बारी ते पर बैठी कौन सवारी?
ते पर बैठी पठान की सवारी कौन पठान. कमाल खान कमाल खान मुगल बागान बेठ्यो चबूतरे पढ़े कुरआन,
हज्जार काम दुनिया का करया, एक काम मेरो कर, न करे तो तीन लाख 33 हजार पैगंबरों की दुहाई.
तेरे को माता अंजिनी के पूत की दुहाई. आदेश गुरु औघड़ नाथ जी का..”
जाप विधि:
- किसी भी शुक्रवार या गुरुवार से प्रारंभ करें
- काले हकीक की माला या कमलगट्टे की माला से 10 माला (1080 बार) जाप करें
- वस्त्रों पर गुलाब का इत्र लगाएं
- पश्चिम दिशा की ओर मुख करके बैठें
- 5 शुक्रवार तक यह साधना करें
- पूर्णाहुति में कमाल खान, हनुमान जी और औघड़ नाथ के नाम से जरूरतमंद बच्चों को मिठाई वितरित करें
अन्य शक्तिशाली शिव पार्वती मंत्र
मंत्र 1: प्रेम आकर्षण के लिए
“ॐ नमः शिवाय पार्वती पतये हर हर महादेव”
यह मंत्र प्रेम को आकर्षित करने और संबंधों में सामंजस्य लाने के लिए उपयोग किया जाता है।
जाप विधि:
- सोमवार को प्रारंभ करें (शिव का दिन)
- प्रतिदिन 108 बार जाप करें
- 40 दिनों या 108 दिनों तक निरंतर जाप करें
- शिवलिंग पर जल, बिल्वपत्र, दूध अर्पित करें
मंत्र 2: वैवाहिक समस्याओं के लिए
“ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं पार्वत्यै नमः”
यह मंत्र वैवाहिक जीवन में आ रही समस्याओं को दूर करने और पति-पत्नी के बीच प्रेम बढ़ाने के लिए प्रभावी है।
मंत्र जाप के लिए शुभ दिन और समय
सर्वश्रेष्ठ दिन
- सोमवार (Monday): भगवान शिव का दिन, सबसे शुभ
- शुक्रवार (Friday): शुक्र ग्रह का दिन, प्रेम और संबंधों के लिए उत्तम
- गुरुवार (Thursday): गुरु का दिन, वैवाहिक सुख के लिए लाभकारी
विशेष तिथियां
- नवमी
- दशमी
- एकादशी
- पूर्णिमा
- महाशिवरात्रि (सबसे शक्तिशाली दिन)
सर्वश्रेष्ठ समय
प्रातःकाल (सूर्योदय से पहले) – यह समय सबसे शुभ और आध्यात्मिक रूप से शक्तिशाली माना जाता है।
मंत्र जाप के लाभ
1. प्रेम आकर्षण
मंत्र की ऊर्जा आपकी चुंबकीय शक्ति को बढ़ाती है, जिससे आप संभावित जीवनसाथी के लिए अधिक आकर्षक बन जाते हैं।
2. बाधाओं का निवारण
कुंडली दोष, मांगलिक दोष, पितृ दोष, पारिवारिक विरोध, सामाजिक समस्याएं आदि सभी बाधाएं दूर होती हैं।
3. सामंजस्य और प्रेम
दंपत्ति के बीच भावनात्मक संबंध, समझ और प्रेम में वृद्धि होती है।
4. शीघ्र विवाह
लंबे समय से रुका हुआ विवाह शीघ्र संपन्न होता है।
5. इच्छित जीवनसाथी
प्रेम विवाह में सफलता और इच्छित व्यक्ति से विवाह की संभावना बढ़ती है।
6. वैवाहिक सुख
विवाहित जोड़ों के बीच मतभेद दूर होते हैं और संबंधों में मिठास आती है।
मंत्र जाप में सफलता के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
1. विश्वास और श्रद्धा
मंत्र की सफलता 100% विश्वास पर निर्भर करती है। जितना अधिक विश्वास, उतनी अधिक सफलता।
2. नियमितता
एक बार प्रारंभ करने के बाद बीच में न छोड़ें। नियमित और निरंतर जाप करें।
3. शुद्ध भावना
मंत्र को प्रेम और भक्ति भाव से करें, न कि केवल दायित्व समझकर।
4. उच्चारण की चिंता न करें
जैसे एक शिशु रोता है और माँ उसकी भाषा समझ लेती है, वैसे ही देवी आपकी प्रार्थना की भावना समझती हैं। छोटी-मोटी उच्चारण की गलतियां क्षमा हो जाती हैं।
5. सात्विक जीवनशैली
- शुद्ध शाकाहारी भोजन करें
- मांस, मदिरा, तामसिक भोजन से दूर रहें
- ब्रह्मचर्य का पालन करें (साधना काल में)
- क्रोध, लोभ, मोह से बचें
6. स्वच्छता
- स्नान करके पूजा करें
- साफ कपड़े पहनें
- पूजा स्थल को स्वच्छ रखें
सामान्य प्रश्न और उत्तर
प्रश्न 1: क्या यह मंत्र निश्चित रूप से काम करता है?
मंत्र की सफलता आपकी भक्ति, विश्वास और भाग्य पर निर्भर करती है। यदि आपकी श्रद्धा 100% है तो परिणाम भी उतने ही प्रभावी होंगे। मंत्र एक भूखे बच्चे के रोने की तरह है – ईमानदारी से प्रार्थना करें।
प्रश्न 2: क्या 1008 बार जाप अनिवार्य है?
हां, न्यूनतम 1008 बार प्रतिदिन जाप करना चाहिए। यदि 108 बार करेंगे तो 100008 जाप पूरे करने में लगभग 2.5 वर्ष लग जाएंगे। मंत्र की शक्ति 200-300 बार के बाद ही अनुभव होती है।
प्रश्न 3: मासिक धर्म के दौरान क्या करें?
महिलाएं मासिक धर्म के दौरान जाप को रोक सकती हैं और बाद में फिर से जारी कर सकती हैं।
प्रश्न 4: स्वयं करें या पंडित से करवाएं?
स्वयं करना सबसे उत्तम है क्योंकि आप मंत्र की शक्ति का प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं। यदि समय या स्वास्थ्य की समस्या हो तो ही पेशेवर सहायता लें।
प्रश्न 5: प्रेम विवाह के लिए कितना प्रभावी है?
यदि आपकी श्रद्धा और प्रेम सच्चा है तथा भाग्य साथ दे रहा है, तो यह मंत्र अत्यंत प्रभावी है। हजारों लोगों ने इसे सफल पाया है।
महाशिवरात्रि: शिव-पार्वती विवाह का उत्सव
महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती के दिव्य विवाह का उत्सव है। यह हिंदू पंचांग के फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है।
महाशिवरात्रि का महत्व
- यह दिन शिव-पार्वती के विवाह का दिन माना जाता है
- इस रात्रि में आध्यात्मिक ऊर्जा अपने चरम पर होती है
- भगवान शिव अपना तांडव नृत्य करते हैं
- इस दिन किया गया उपवास और पूजा अत्यंत फलदायी होती है
महाशिवरात्रि की पूजा विधि
- पूरे दिन व्रत रखें
- रात्रि जागरण करें
- शिवलिंग पर बिल्वपत्र, दूध, जल अर्पित करें
- “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें
- शिव पार्वती की कथा सुनें और आरती करें
विवाह से संबंधित मनोकामनाओं के लिए महाशिवरात्रि का दिन सर्वाधिक शुभ और शक्तिशाली माना जाता है।
अन्य सहायक उपाय
1. विवाह यंत्र
स्वयंवरा पार्वती यंत्र या विवाह यंत्र को ऊर्जावान करके अपने पूजा स्थल पर रखें।
2. रुद्राक्ष धारण करें
5 मुखी रुद्राक्ष की माला या पेंडेंट धारण करने से शिव की कृपा प्राप्त होती है।
3. गौरी शंकर रुद्राक्ष
यह दो रुद्राक्ष प्राकृतिक रूप से जुड़े होते हैं और शिव-पार्वती का प्रतीक हैं। वैवाहिक सुख के लिए अत्यंत लाभकारी।
4. उपवास
- सोमवार का व्रत (भगवान शिव के लिए)
- शुक्रवार का व्रत (माता पार्वती के लिए)
- 16 सोमवार का व्रत (विवाह के लिए विशेष)
5. दान और पुण्य कार्य
- जरूरतमंदों को भोजन कराएं
- कन्याओं को भोजन और वस्त्र दान करें
- गरीब कन्याओं के विवाह में सहायता करें
निष्कर्ष
भगवान शिव और माता पार्वती के मंत्र प्रेम विवाह और वैवाहिक जीवन की समस्याओं के लिए सबसे शक्तिशाली और प्रभावी उपाय हैं। स्वयंवरा पार्वती मंत्र संपूर्ण हिंदू मंत्र परंपरा में एकमात्र ऐसा मंत्र है जो विशेष रूप से विवाह के लिए समर्पित है।
जैसे माता पार्वती ने अपनी कठोर तपस्या और अटूट भक्ति से भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया, वैसे ही श्रद्धा, विश्वास और समर्पण के साथ इन मंत्रों का जाप करने से आप भी अपने प्रेम विवाह में सफल हो सकते हैं और सुखी वैवाहिक जीवन प्राप्त कर सकते हैं।
याद रखें कि मंत्र केवल शब्द नहीं हैं – वे दिव्य ऊर्जा का प्रवाह हैं। जब आप पूर्ण श्रद्धा, शुद्ध भावना और निरंतर अभ्यास के साथ इन मंत्रों का जाप करते हैं, तो ब्रह्मांड की शक्तियां आपके साथ मिलकर आपके मार्ग को सुगम बना देती हैं।
हर हर महादेव! जय माता पार्वती!
अस्वीकरण: यह लेख केवल सूचनात्मक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के उद्देश्य से लिखा गया है। व्यक्तिगत परिणाम श्रद्धा, भक्ति और व्यक्तिगत परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय लेने से पहले योग्य ज्योतिषी या पंडित से परामर्श लें।
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